पितृ पक्ष क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के सोलह दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं — सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर में। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी के निकट आती हैं, और इसी कारण इस समय किया गया श्राद्ध-तर्पण विशेष फलदायी माना जाता है।

तिथि कैसे तय करें

सामान्यतः पूर्वज की मृत्यु की तिथि (पक्ष व तिथि) के अनुसार ही श्राद्ध की तिथि तय की जाती है। यदि सही तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष की अंतिम तिथि) पर श्राद्ध करना उचित माना जाता है — यह सभी पूर्वजों के लिए सामान्य तिथि है।

गया जी में यात्रा की योजना

  • पं. अंकित जी से पहले ही संपर्क करें — यह वर्ष का सबसे व्यस्त समय होता है
  • यात्रा के लिए 2-3 दिन का समय रखें, ताकि सभी अनुष्ठान बिना जल्दबाजी के हो सकें
  • पूर्वजों के नाम और संभव हो तो मृत्यु तिथि की जानकारी साथ रखें
  • सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें — अधिकांश पूजन सामग्री स्थानीय रूप से उपलब्ध हो जाती है

पितृ पक्ष के दौरान अपनी तिथि सुरक्षित करना चाहते हैं?

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क्या पितृ पक्ष के बाहर भी अनुष्ठान हो सकता है

हां — यदि पितृ पक्ष के दौरान आना संभव न हो, तो पिंड दान, तर्पण या श्राद्ध वर्ष में अन्य समय भी करवाया जा सकता है। पं. अंकित जी आपकी सुविधा के अनुसार उपयुक्त तिथि सुझाते हैं।