काल सर्प दोष कैसे बनता है
जब कुंडली के सभी सात ग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — राहु और केतु के बीच घिर जाते हैं, तो इसे काल सर्प दोष कहा जाता है। ज्योतिष में इसके बारह प्रकार बताए गए हैं, जैसे अनंत, कुलिक, वासुकी, तक्षक और शेषनाग — प्रत्येक का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में माना जाता है।
पहचानने के सामान्य लक्षण
- करियर, व्यापार या विवाह में लगातार देरी
- मेहनत के अनुरूप परिणाम न मिलना
- आर्थिक स्थिति में बार-बार उतार-चढ़ाव
- अकारण मानसिक तनाव या अनिश्चितता का भाव
- सांप से जुड़े स्वप्न बार-बार आना
पं. अंकित जी यह स्पष्ट करते हैं कि जीवन की हर समस्या इस दोष के कारण नहीं होती — कुंडली का पूरा अध्ययन करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जानी चाहिए।
गया जी में निवारण की विधि
काल सर्प दोष निवारण पूजा भगवान शिव और नागों को समर्पित होती है, जिसमें रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और हवन शामिल हैं। कई परिवार इसे विष्णुपद मंदिर परिसर में पिंड दान के साथ ही एक ही यात्रा में पूरा करवा लेते हैं।
निवारण के लिए शुभ समय
नाग पंचमी, महाशिवरात्रि, श्रावण मास की पंचमी तिथि और सावन के सोमवार इस पूजा के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं — हालांकि आवश्यकता पड़ने पर यह वर्ष में किसी भी समय करवाई जा सकती है।
पं. अंकित जी हर परिवार को कुंडली दिखाने से लेकर पूजा पूर्ण होने तक स्पष्ट रूप से हर चरण समझाते हैं।
