अनुष्ठान के तुरंत बाद
- पुरोहित द्वारा बताए गए संकल्प और प्रसाद को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें
- संभव हो तो उसी दिन ब्राह्मण भोजन या दान-पुण्य करें
- विष्णुपद मंदिर में अंतिम दर्शन और आशीर्वाद लें
अगले कुछ दिनों में
अधिकांश परिवार पिंड दान के साथ ही तर्पण भी करवा लेते हैं — यदि यह न हो पाया हो, तो इसे जल्द से जल्द पूरा करना उचित माना जाता है। कुछ परंपराओं में अनुष्ठान के बाद कुछ दिनों तक सात्विक भोजन और सादा जीवन जीने की सलाह दी जाती है।
क्या दोबारा पिंड दान करवाने की जरूरत है
नहीं — एक बार विधिवत पिंड दान हो जाने के बाद, परंपरा के अनुसार इसे दोबारा करवाने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि यदि परिवार में कोई विशेष समस्या बनी रहे और पितृ दोष की आशंका हो, तो त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे अतिरिक्त अनुष्ठान की सलाह दी जा सकती है।
मन की शांति सबसे जरूरी
पं. अंकित जी हमेशा कहते हैं कि पिंड दान का उद्देश्य दायित्व निभाना है, और जब यह श्रद्धापूर्वक और सही विधि से पूरा हो जाता है, तो परिवार को इसके बाद किसी अतिरिक्त चिंता की आवश्यकता नहीं होती।


